Wednesday, 18 January 2012

हम क़लम हम ज़ुबान बन जाओ


हम   क़लम     हम ज़ुबान   बन जाओ,
बन    सको तो     इन्सान   बन जाओ.

तारीकी    -ए- जेहालत    है      हर    सू,
नूर-ए-इल्म    बनो, फैज़ान बन    जाओ.

हालात  -ए-    जंग    हों         गर     पैदा,
वतन-ए-अज़ीज़ का पासबान बन जाओ.

12 comments:

  1. हम क़लम हम ज़ुबान बन जाओ,
    बन सको तो इन्सान बन जाओ.

    अर्थपूर्ण सन्देश ....

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  2. हम क़लम हम ज़ुबान बन जाओ,
    बन सको तो इन्सान बन जाओ.

    waah kya baat hai .badi bebaki se bayan kiya hai aapne waah

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  3. आगामी शुक्रवार को चर्चा-मंच पर आपका स्वागत है
    आपकी यह रचना charchamanch.blogspot.com पर देखी जा सकेगी ।।

    स्वागत करते पञ्च जन, मंच परम उल्लास ।

    नए समर्थक जुट रहे, अथक अकथ अभ्यास ।



    अथक अकथ अभ्यास, प्रेम के लिंक सँजोए ।

    विकसित पुष्प पलाश, फाग का रंग भिगोए ।


    शास्त्रीय सानिध्य, पाइए नव अभ्यागत ।

    नियमित चर्चा होय, आपका स्वागत-स्वागत ।।

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  4. Ravikar bhai meri rachna ko charchamanch me sthan dene ke liye bahut bahut sukriya.......

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  5. वाह ||
    बहुत खूब..

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